एपिसोड 4 : फर्स्ट किल
- grannykapitara
- Jul 26, 2021
- 1 min read
Updated: Aug 5, 2021
यूनिवर्सल ट्रुथ का कॉन्सेप्ट इंसान ने अपने मन को टुकड़ों में बांटते - बांटते झुठला दिया. एक वक्त में कई जिंदगी जीने के इस गोरखधंधे ने हमारी दुनिया को दो तरह के सच में बांट दिया है, 'तुम्हारा सच' और 'मेरा सच'.

आदित्य की कश्मकश इन्हीं दोनों के बीच का पेंडुलम है. अपनी जॉब को लेकर तमाम तरह की सिंसियरिटी के बावजूद उसने इन्सानों को आंकड़ों की तरह बरतना अभी नहीं सीख पाया है. पहले एनकाउंटर को अंजाम देने के बाद वह अपने दिमाग के मिक्सड रिएक्शंस से उलझने - जूझने में लगा ही है कि उसके सामने मरने वाले की आइडेंटी का सवाल उठ खड़ा होता है. रघु और मुरली की पहचान उसके लिए वो कटघरा बन जाती है जहां उसकी गन से चली गोली को सही या ग़लत साबित करने का फैसला होना है.
सच और झूठ की तलाश में जब वह मोना और रघु के पैरेंट्स की अलग- अलग दुनिया के ताने- बाने में उलझता है तब उसे पता चलता है कि हर इंसान का सच का अपना अलग वर्जन होता है और दो लोगों के सच के बीच एक जिंदगी के बराबर दूरी होती है.
PS: वायलेंस और अब्यूजिव कंटेंट के दौर में इस एपिसोड को इस बात के रिमाइंडर के तौर पर दुबारा देखा जा सकता है की अच्छे एक्सप्रेशन के लिए एक्सट्रीम्स की जरूरत नहीं होती.




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