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एपिसोड 2 : शुरुआत

Updated: Aug 5, 2021


किसी और की जिंदगी की सच्चाई हमारे लिए हमेशा एक कहानी ही होती है.

वो कहानी जिसे जितना हमने सुना उतना ही जाना. बहुत करीबी होकर भी कई बार कहानियों की सच्चाई जान पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. मन की इस भटकन - उलझन के बेस में दबी रहतीं हैं स्टरियोटाइप इमेजेज़, जिन्हें सालों से सुनते- मानते हम उन्हें ही सच बना बैठे हैं. स्टरियोटाइप्स की इसी साइकोलॉजी को थीम बना कर कहीं गई है स्टार- बेस्टसेलर के दूसरे एपिसोड 'शुरुआत' की कहानी.

उर्मिला और समीरा की बॉन्डिंग सिर्फ अपने रिश्ते का ही स्टरियोटाइप नहीं तोड़ती बल्कि रिलेशन और जेंडर दोनों से ऊपर जाकर एक बहुत ही नेचुरल और कंफर्टेबल कनेक्शन का एग्जाम्पल सेट करती है. यहां स्पेस ना कंसर्न को कम करता है ना प्यार के एक्सप्रेशन को. समीरा जब उर्मिला को पॉटरी फिर से शुरू करने के लिए बोलती है तो उर्मिला का कहना " हमारा साथ था इसलिए कर पाई..." इतना सहज है कि उसमें कोई दुःख, नाराज़गी या अफ़सोस शामिल ही नहीं हो पाता है.


डॉ. दीक्षा दोनों के बीच कनेक्टिंग पोल की तरह है, एक मोड़ पर आकर जब उर्मिला भी कुछ कदम लड़खड़ा जाती है तब डॉ. दीक्षा का सहजता से कहना " क्योंकि वो दोनों नहीं निभा पाए...बस." और फिर दोस्ती और प्रोफेशनल एथिक्स दोनों को बैलेंस करना किसी भी वुमन एंपॉवरमेंट की बहस से ज्यादा असरदार है. आख़िरी सीन में समीरा का डॉक्टर के केबिन के अंदर जाना और उर्मिला का एक पल ठहरकर मुस्कुराते हुए बाहर निकलना एक सिंबॉलिक एक्सप्रेशन है कि जिंदगी की सच्चाइयों को ड्रामेटिक या कंफर्टेबल बनाना उनको साथ जीने वालों पर डिपेंड करता है.

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