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एक शाम बस यूँ ही सी.....

Updated: Aug 5, 2021

हाँ अब मुझे बुरा नहीं लगता...


अगर कुछ टिकट खो जाते हैं, या गिफ्ट रैपर्स नहीं मिलते. अब कोई खोई हुई पैकिंग स्लिप मेरी नींद में आकर आहट नहीं बनती.

हंसी आती है याद करके...कितना गुस्सा आया था तुम पर, जब रेस्टोरेंट का वो एक बिल गलती से मुझे देना भूल गए थे तुम, और खुद पर भी....शर्ट के साथ धुल जो दी थी मैंने उस पल की यादें !


मैं एक- एक पल कैद करती जाती थी स्क्रैपबुक में, जैसे आज का यकीन करना हो सबूत रख कर. या फिर कल इसी आज में जीना हो. तुम इसे "प्यार का डॉक्यूमेंटेशन" कहते थे.


स्क्रैपबुक से तो उन लम्हों को वक़्त मिटा देगा, पर दिल पर तो वक़्त की इरेज़र नहीं चलती न...

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