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माँ के लिए...

Updated: Aug 5, 2021

मेरे जीवन का पहला रंग,

तुम्हारे पैरों का आलता था.


तुम 'किस्सा क्वीन' थीं!

हर त्योहार, हर लोकोक्ति से जुड़ी कहानियां, किसान की फसल, घर की सफाई, प्राकृतिक चक्र !

पता है, अब लोग ये सब नहीं समझते. अब की दुनिया बहुत अलग है मां ! यहां 'सेलिब्रेशन' और 'रीति- रिवाज' की जमीन पर 'लेन- देन' के जहरीले मशरूम उग आये हैं. तोहफों को भी तो घर नहीं मिलता, जगहें बदलते हुए अक्सर किसी डस्टबिन में मिल जाते हैं.


ऐसे वक्त में तुम्हारी 'गिफ्ट- रैप' भी संभालकर रखने वाली बेटी क्या करेगी यही सोच रही हो न?


कुछ बड़ा नहीं....बस संभालकर रखेगी अपना बचपन, तुम्हारे भिजवाए आखिरी लिफाफे में.


और फिर, आज से कई सालों बाद.....

जब मैं अपनी बेटी को बताऊंगी

कि हल्दी और चूना, पानी की बूंदों से मिलकर बनाते हैं

'रोली' का लाल रंग

तब वो इसे कहेगी - "जादू!"

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