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Updated: Aug 6, 2021

किताब - टर्म्स एंड कंडीशन अप्लाई लेखक - दिव्य प्रकाश


यह सिर्फ दुकानों पर मिलने वाले सामानों पर ही नहीं लिखा होता, रियल लाइफ की बहुत सी सिचुएशन भी इसी स्टार (*) के साथ आतीं हैं.

यह किताब भी उन्हीं सिचुएशनस और उन सिचुएशनस में घिरे लोगों की बात करती है.

किताब में कुल 14 कहानियाँ हैं. कहानियों के शहर और वक़्त चाहे जो भी रहे हों, हर एक कैरेक्टर हमें अपने आस-पास का ही लगता है.

'They lived happily ever after' के 'अभिषेक-प्रीती', 'kitty' के 'किट्टी भैया', 'Sangam Caterer' के 'पाण्डेय अंकल', 'समोसा' के 'पुत्तन भाई' या फिर 'welcome' के मकान मालिक और किरायेदार जैसे लोग हमारी ही कॉलोनी- मोहल्लों में रोज देखने को मिलते हैं. 'सैलून' जहाँ दबी जुबान में कहे जाने वाले 'दीक्षित जी ' जैसे लोगों के सच को आवाज़ देती है, वहीँ 'room no 303' में सिंगल मदर और वर्किंग वुमन की जिंदगी को बिना किसी प्रिज्युडिस के बहुत अच्छी तरह एनालाइज्ड़ किया गया है. 'लोलिता', 'monkey man', 'ask expert' और 'let 's go home' बच्चों और टीनेजर्स के कन्फ़्यूजन और कॉम्प्लीकेशन से डील करने वाली कहानियाँ हैं, जिन्हें कोमल मन की उन्हीं गहराईयों तक पहुंचकर लिखा गया है. 'class 9th B' किसी हद तक किताब की थीम से हटकर लगती है, पर इस से दिव्य की वर्सेटालिटी का भी पता चलता है. 'hard cash' एक तरह से मेमॉईर है.

किताब की भाषा-शैली लेखक की यूनिकनेस है, इंग्लिश के शब्दों का प्रयोग उसी सहजता से हुआ है जिस सहजता से वो हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल हैं. यह बात इस किताब को स्टूडेंट, वर्किंग- पर्सन और हाउस- वाइफ सभी के लिए आसानी से पढ़ने-समझने लायक और सबके लिए बराबर इंट्रेस्टिंग बनाती है.

दिव्य की यह पहली किताब है, और प्रेजेंटेशन को देखते हुए ये कहना गलत न होगा की ऐसी किताबें वो दिन लाएंगी जब मेट्रो में हमारे सामने की सीट पर जीन्स पहने बैठी लड़की के हाथ में भी हिंदी की किताब होगी.


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